हर हाल में बने ब्लागरों का संगठन

बिगुल हो सकता है कि हर बार कि तरह कुछ विघ्नसंतोषी मेरी बातों का दूसरा ही अर्थ निकाले लेकिन मैं मानता हूं कि जब रिक्शे और आटो वालों का संगठन हो सकता है तो फिर ब्लागरों का संगठन क्यों नहीं हो सकता है। दिल्ली के ब्लागर मिलन समारोह में इस बार भी यही चिन्ता उभरकर... [पूरी पोस्ट]
writer राजकुमार सोनी
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[24 May 2010 04:40 AM]

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