मर्ज बढ़ता गया ज्यों-ज्यों दवा की
डीटीसी के घाटे का मुद्दा उतना ही पेचीदा हो गया है जितना कश्मीर मुद्दा। मंत्री से लेकर मैनेजर तक सभी सिर धुनकर बैठ गए हैं लेकिन समझ में नहीं आ रहा डीटीसी का क्या करें, इस घाटे का क्या करें। कहने को तो नई बसें, नए बस क्यू शेल्टर, नए बस डिपो...बढ़िया है...
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दिलबर गोठी
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[24 May 2010 04:31 AM]



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