एक छोटी सी मुलाकात नामवर सिंह से
कम्युनिस्ट आन्दोलन के लिए गुंजाइश कम है। समालोचना के पितामह के नाम से विख्यात नई कहानी, नई कविता के नये प्रतिमान रचने वाले नामवर सिंह से छोटी सी मुलाकात-- माक्र्स के बाद का विश्व काफी बदल चुका है। पर माक्र्सवाद के सिद्धान्तों में फेर- बदल नहीं हुए हैं।...
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shelley
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[24 May 2010 03:45 AM]



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