सातवीं क़िस्त- कौन चला बनवास रे जोगी

आज के ग़ज़लकार और ग़ज़ल. विलास पंडित "मुसाफ़िर" के इस खूबसूरत शे’र के साथ -उसमें विष का वास भरा हैशब्द है जो विश्वास रे जोगीऔर माहक साहब के इस फ़लसफ़े-बीता जीवन,जी लीं साँसेंबीत गया मधुमास रे जोगी-के साथ हाज़िर हैं सातवीं क़िस्त की तीन ग़ज़लें।डा.अहमद अली बर्क़ी आज़मीप्रीत न आई रास... [पूरी पोस्ट]
writer सतपाल ख़याल

कौन चला बनवास रे जोगी

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[24 May 2010 03:46 AM]

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