एक पुरानी कवित
उफ़..... ! आज आप से रु-ब-रु होने में देर हो गयी... ! कुछ उलझन थी... लेकिन अब आपके नजर कर रही हूँ होल्लर मोरादाबादी की एक मशहूर हास्य-कविता ! नेता भाषण देकर आया। आ कर नौरकर पर गुर्राया। मैं आया हूँ थका-थकाया।पैर दबाओ, रामलुगाया ! रामलुगाया बोला, मालिक !एक...
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हास्यफुहार
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[24 May 2010 03:09 AM]



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