यादों के पल

कुछ मेरी कलम से -kuch  meri kalam se ** जीवन की रेल पेल मेंहर संघर्ष को झेलतेहर सुख दुःख को सहतेकभी मैंने चाही नही इनसे मुक्तिपर कभी बैठे बैठे यूं ही अचानकजब भी याद आई तुम्हारीतब यह मन आज भीभीगने सा लगता हैचटकने लगते हैं तन मन मेंजैसे मोंगारे के फूलऔर जैसेसर्दी से कांपते बदन मेंतेरी याद का... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना [रंजू भाटिया]

kuch-yu-hi

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[24 May 2010 03:04 AM]

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