वे इसे सुख कहते हैं
पवित्र परिवार!साथ साथ रहते हैं दोनोएक ही घर मेंजैसे यूंही रहते आये होंपवित्र उद्यान से निष्काषन के बाद से हीअंतरंग इतने कि अक्सरयूं ही निकल आती है सद्यस्नात स्त्रीजैसे कमरे में पुरूष नहीं निर्वात हो अशरीरीचौदह वर्षों से रह रहे हैंएक ही छत के...
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अशोक कुमार पाण्डेय
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[24 May 2010 02:03 AM]



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