ब्लोगोत्सव-२०१० : ..मॉल , यानी.....शोखियों में घोला जाये,फूलों का शबाब

परिकल्पना मॉल , यानी.....शोखियों में घोला जाये,फूलों का शबाब,उसमें फिर मिलाई जाये-थोड़ी सी शराब..........दुनिया कहाँ- से- कहाँ आ गई!मॉल जाने का नशा -सा हो चला है,लेबल लगे कपड़े,( एक ही प्रिंट के),डब्बा बंद खाना,कटी सब्जियां ,आधी सिंकी रोटी...किसी भी दिन... [पूरी पोस्ट]
writer रवीन्द्र प्रभात

सत्रहवां दिन

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[24 May 2010 01:33 AM]

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