तखल्लुस और कविता में उपनाम की परंपरा

विचार-बिगुल किसी भी कवि सम्मेलन को देखो अथवा मुशायरे को। वहां इस अदब के नामचीन लोग मिल जायेंगे। किसी का नाम भोंपू है तो कोई पागल है। कोई सरोज है तो कोई रंजन। कोई संन्यासी है तो कोई निखिल संन्यासी। लेकिन इस सच्चाई को बहंत कम लोग ही जानते होंगे कि इनके असली नाम कुछ और... [पूरी पोस्ट]
writer Dr M.S. Parihar
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[24 May 2010 00:56 AM]

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