मीडिया के मुकाबले साहित्य बहुत सुस्त है
मीडिया के लिए साहित्य जरूरी नहीं। साहित्य से मीडिया परहेज करता है। मीडिया को हर पल अपने आसपास सनसनी की तलाश रहती है पर साहित्य में सनसनी जैसा कुछ नहीं होता। मीडिया में सबकुछ बहुत तेजी से चलता और बदलता रहता है मगर साहित्य में बदलाव न के बराबर होते हैं। कह...
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अंशुमाली रस्तोगी
नज़रिया
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[24 May 2010 00:58 AM]



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