विलंबित खुशियाँ

नीरव क्या इनको लेकर करूँगा, असमय जो तूने दी सौगातेंक्या इनको लेकर करूँगा।।जब इनकी कुछ चाह मुझे थी.जब इनकी परवाह मुझे थी,उस समय तूने की बेपरवाही अबक्या इनको लेकर करूँगा।।खुशियों को गम में बदलकर,ग़म को भी भोगा तनहा,अब यदि नीरव नीर बहाएँ,क्या इनको लेकर... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. राजेश नीरव
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[24 May 2010 00:42 AM]

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