चल छैंयां-छैय़ां वाली इस पीढी को तो---gazal
फूल बुरा लगता है,पान बुरा लगता हैजब टूटे दिल तो भगवान बुरा लगता हैचल छैंयां-छैय़ां वाली इस पीढी को तोयारो मीरा पगली,रसखान बुरा लगता हैदेव अतिथि होता होगा मेरे यार कभी अब तो घर आया मेहमान बुरा लगता हैवक्त नया आया है,आये संस्कार नयेअब तो झूठ भला,ईमान बुरा...
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श्याम सखा 'श्याम'
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[24 May 2010 00:17 AM]



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