यह शक्ति नष्ट हुई कि अपनी सारी ज़िन्दगी कौड़ी कीमत की हो जाती है

जय हिन्दी  जय हिन्द ! महज किताबें पढ़ने का चटखारा लगाकि ख़ुद की सार-असार विचार-शक्ति कमज़ोर पड़ जाने का डर है;और एक बार यह शक्ति नष्ट हुईकि अपनी सारी ज़िन्दगी कौड़ी कीमत की हो जाती है- स्वामी विवेकानन्द... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
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[24 May 2010 00:16 AM]

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