कहिनी : पिड़हा

गुरतुर गोठ न वा जमाना आय के बाद जुन्ना कतको चीज नंदावत जात हे। एमा सिल लोड़िहा, पिड़हा, जांता, झउंहा अउ कतको जिनिस सामिल हवय। जांता तो आज कल बिलकुले नंदा गे हे। गांव में घलो खोजबे तो मिलना मुसकिल हे। वइसने मिक्सी के आय ले पढ़े-लिखे माइ लोगन मन सिल लोड़िहा ल हिरक के नइ... [पूरी पोस्ट]
writer संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari

कहिनी

views
12
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
1
[23 May 2010 22:41 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix