इन्हें आता है
यह तो होना था ...मैं नहीं रही !मेरी आँखों , मेरे स्वर मेरे स्पर्श की गर्माहट से सुरक्षित मेरे बच्चे शून्य में हैं !यूँ समझा दिया था सब -'जब भी यह दिन आए अपना हौसला मत खोना जैसे अब तक मेरे पास अपनी बात रखते आए होतब भी रखना - जब मैं ना रहूँयकीन रखनामैं सब...
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रश्मि प्रभा...
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[23 May 2010 22:21 PM]



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