हमने तो आलने में............
हमने तो आलने में दिए है जलाएये फिर आँखों से धुआं क्यों उठाहमने तो बागों में फूल है खिलायेये फिर फूलों का रंग क्यों उड़ाजागते हम रात से सुबह तलकफिर भी नींद का खुमार क्यों न चढ़ारैन तो रात भर जलता रहापर नैनो ने रात भर ख्वाब न बुनाहम तो तारों पर है चलते...
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ana
kavita
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[23 May 2010 22:44 PM]



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