अंधेरा

पंजाबी लघुकथा कुलजीत ग़ज़ल उस दिन बस कुछ ज्यादा ही लेट हो गई थी। सर्दी के कारण सूरज के धुंध में छिपने से एकदम अंधेरा हो गया था। मन में डर था कि आज घर के सदस्यों ने मुझे नहीं छोड़ना। खैर! डरते-डरते अभी मैने घर के दरवाजे के भीतर पाँव रखा ही था कि सारा परिवार मेरी तरफ खा... [पूरी पोस्ट]
writer दीपशिखा

कुलजीत ग़ज़ल

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[23 May 2010 22:04 PM]

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