खण्डहर

हिन्दी ब्लाग  खण्डहर पुकार रहे हैंमैं बीता हुआ कल हूंअतीत की लाश हूंमुझे हटाओनया बनाओ पर मुझे उनकी आवाज सूनाई नहीं देती और आंखों के सामने खुली सच्चाई दिखाई नहीं देती मैं खण्डहर भक्त हूं खण्डहर के शत्रु मूझे समाज के शत्रु प्रतीत होते हैं यद्यपि मैं अंधा हूं और शायद... [पूरी पोस्ट]
writer BalMukund Agrawal
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[06 May 2010 13:16 PM]

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