कविता हवा चली
हवा चली हवा चली भाई हवा चली,दूर दूर तक हवा चली....हवा चली भाई हवा चली,गर्मी में तो आग गिरे....आमो को तो हम खाये,अपने घरों के पास पेड़ लगाये....पेड़ पौधों को लगाने से प्रदुसन न होता,हवा चली भाई हवा चली.....लेखक लवकुश कक्षा ६ अपना घर कानपुर...
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BAL SAJAG
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[23 May 2010 13:25 PM]



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