“जीवन जीने की आशा है” (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

uchcharan जीवन इक खेल तमाशा है,जीवन जीने की आशा है।जिसने जग में जीवन पाया,आया अदभुत् सा गान लिए।मुस्कान लिए अरमान लिए,जग में जीने की शान लिए।इस बालक से जब यह पूछा,बतलाओ तो जीवन क्या है?बोला दुनिया परिभाषा है ,सारा जीवन एक भाषा है।जीवन इक खेल तमाशा है,जीवन जीने की... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

कविता

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[23 May 2010 12:51 PM]

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