तोर रूप गजब...... धान के कटोरे की महक पहुँचाती एक अनुपम कृति.....सतीश पंचम
कुछ उपन्यास ऐसे होते हैं जो कि कथा-कहानी की मान्य लकीरों को लगभग काटते हुए सनसनाते हुए निकल लेते हैं और जब तक कि आप समझें कि क्या हुआ, वह उपन्यास आगे किसी खेत में खड़ा मिलता है, हंसते हुए, अपने पीछे बुलाते हुए और इस बात का...
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सतीश पंचम
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[23 May 2010 13:03 PM]



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