स्पर्श लौट आते हैं हथेली में
###आजकल न कविता हैन प्रेम हैऔर न प्रेम कवितायेंसिर्फ भेदती हुई एक खामोशी हैजो शाम केधुंधले प्रकाश के मर जाने के बाद भीचिलचिलाती रहती हैऔर एक कई रातों से नहीं सोया एकांत हैजिसमें तुम्हें कहीं न पाकरस्पर्श लौट आते हैं हथेली मेंऔर बिस्तर पे देर तक...
[पूरी पोस्ट]
ओम आर्य
12
1
0
1
9
[23 May 2010 12:38 PM]



Shuffle








