हम आपको तकलीफ देना नहीं चाहते

कच्‍चा चिट्ठा जावेद साहब अपने किसी काम से बेंगलोर आये हुए थे। उम्मीद कर रहा था कि आजकल में मुझसे मिलने आयेंगे। फोन करके उन्होंने बताया कि वे कल का लंच मेरे साथ करेंगे क्यों कि लंच के बाद ही उन्हें ट्रेन पकड़नी है। नहीं तो मिलना नहीं हो पायेगा। मैंने कहा कि आप आइए। लंच... [पूरी पोस्ट]
writer मथुरा कलौनी

संस्मरण

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[23 May 2010 10:14 AM]

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