जनता का गाना

जनपद अरविंद चतुर्वेद :बोलो यारो, अब भी क्या कुछ बाकी रहा जमाने मेंकटे जिंदगी अपनी ऐसे, जैसे जेहलखाने में!बोझा ढोओ मत सुस्ताओहंसकर कहो कहानी,बीते जुग की बात नहीं हैराजा भी हैं, रानीउनके घोड़े-हाथी भी हैं सबकुछ है तहखाने मेंकटे जिंदगी अपनी ऐसे, जैसे जेहलखाने... [पूरी पोस्ट]
writer अरविन्द चतुर्वेद
views
12
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
1
[23 May 2010 10:09 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix