जनता का गाना
अरविंद चतुर्वेद :बोलो यारो, अब भी क्या कुछ बाकी रहा जमाने मेंकटे जिंदगी अपनी ऐसे, जैसे जेहलखाने में!बोझा ढोओ मत सुस्ताओहंसकर कहो कहानी,बीते जुग की बात नहीं हैराजा भी हैं, रानीउनके घोड़े-हाथी भी हैं सबकुछ है तहखाने मेंकटे जिंदगी अपनी ऐसे, जैसे जेहलखाने...
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अरविन्द चतुर्वेद
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[23 May 2010 10:09 AM]



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