मेरी तौबा (लघुकथा )
"कुछ सोच रही हो " मैंने उसका हाँथ हौले से दबाकर पूछा "नहीं तो " नेहा के चेहरे पर शरारत की लहर दौड़ गई अब वो आसानी से बताएगी नहीं ,जब तक मैं उससे ८ -१० बार पूछ नहीं लूँगा .चार सालों से जानते है एक दुसरे को ऑफिस में मिले,दोस्त बने फिर एहसास हुआ हम अपना...
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Sonal Rastogi
लघुकथा
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[23 May 2010 08:28 AM]



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