प्रकृति उस पर हर विजय का हम से प्रतिशोध लेती है

अनवरत प्रकृति पर अपनी मानवीय विजयों के कारण हमें आत्मप्रशंसा में विभोर नहीं हो जाना चाहिए, क्यों कि वह हर ऐसी विजय का हम से प्रतिशोध लेती है। यह सही है कि प्रत्येक विजय से प्रथमतः वे ही परिणाम प्राप्त होते हैं जिन का हम ने भरोसा किया था, पर द्वितीयतः और... [पूरी पोस्ट]
writer दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

marxim

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[23 May 2010 08:46 AM]

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