मन के फरेब

स्वार्थ सच कुछ भी हो पर मन माने तब ना। वह तो विचार ढूँढे रखता है अपने आप को बहला कर रखने के लिये। अपने मुताबिक शब्दों की खुराक से मन का पेट तो भर जाता है पर वक़्त की कसौटी पर ऐसे बहलाव ऐसे छलावे खतरनाक ही साबित होते हैं। पर मन की [...]... [पूरी पोस्ट]
writer swaarth

poetrycheatingillusionlie

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[23 May 2010 08:25 AM]

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