निर्मल और मैं....
23rd May 23, 2010निर्मल- जब हम कहानी लिखते हैं-या उपन्यास- तो एक फिल्म चलने लगती है- इस फिल्म में छूटे हुए मकान हैं और मरे हुए मित्र, बदलते हुए मौसम हैं और लड़कियाँ, खिड़कियाँ, मकड़ियाँ हैं और वे सब अपमान हैं जो हमने अकेले मे सहे थे, और बचपन के डर हैं और...
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मानव
अपने से...
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[23 May 2010 08:27 AM]



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