ajnabi
तुम्हें याद है ना मेरीआरज़ुओं को आदत थीतुम्हारे फलक केरंगीन सितारे तकने की,इन दिनों ये मुरझाईं-सी हैं ...यूँ करो एक रोज़अपना फलक एकडिबिया में रख केभेज दो ना.....हवा से माँगता नहीं हैंदिल साँस की एकभी लहर क्यूँकिअब हवाओं के दिलमें इश्क नहीं,धडकनों में...
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aanch
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[23 May 2010 08:29 AM]



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