तेरे मन का मंदिर
तेरे मन की खुली खिड़की में झाँकता अक्स मेरा तेरे मनोभावों की हर तह को खोलतापरत- दर- परततेरे अहसासोंको छूता ज्यों चाँदनी कास्पर्श हो तेरे मन की हर तह मेंप्रेम के अथाहसागर कीअनगिनतउछलती मचलतीटकराती और...
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वन्दना
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[23 May 2010 08:01 AM]



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