विलुप्‍त होते लोकगीतों को बचाओ

आरंभ भरथरी गायिका रेखा देवी जलक्षत्री की मन की व्यथाछत्तीसगढ़ की जानी-मानी लोकगायिका रेखा देवी जलक्षत्री पारम्परिक लोकगीतों की उपेक्षा को लेकर चितिंत हैं। उनका मानना है कि नौसिखीए कलाकारों ने छोटी-छोटी मंडली बनाकर लोकगीतों की जगह फूहड़ गीतों को मंच में परोसना... [पूरी पोस्ट]
writer संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari

रेखादेवी जलक्षत्री

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[23 May 2010 07:32 AM]

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