शांति पथ
शांति पथ बाहर हर तरफ हैं गर्म हवा के बबंडर,चक्रवात, तपिश, तूफ़ान और सब कुछ मुरझाया, सूखा उजड़ा सा. जमीं पर पड़े सूखे बेदम, जरा सी हवा में घसिटते, लड़खड़ाते पत्ते. आँधियों में गिरे टूटे कुछ फल, उनको ले जाने कोव्याकुल लोग.फिर...
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[23 May 2010 03:24 AM]



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