'तन्हाई के सहारे'
(पुनः संपादित )----------------------------------------------अपनी तन्हाई में, पर्दों के सहारे हैं ,देखते जिनको ये दिन गुज़ारे हैं,हिलाएं इनको हवाएं जब जब, ये लगे, घर में लोग सारे हैं,दीवार से घड़ियाँ उतार कर रख दीं ,वक्त से रिश्ते, न कुछ हमारे...
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योगेश शर्मा
'तन्हाई के सहारे'
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[23 May 2010 02:15 AM]



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