मेरी एक अप्रकाशित कविता, आप भी पढ़ें...
सालों बाद कोई कविता लिख रहा हूं... यही कोई दस साल बाद... मन के दर्द सहते विचार उद्धेलित होकर जमा हो गए थे, उन्ही के बिखराव को शायद कविता कहने की यह भूल भी हो सकती है... जो भी है, प्रस्तुत है-मैं भी तो कविता कहता था।जब पांव धरा पर रहता था।।जब शीत पवन...
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ANURAAG MUSKAAN
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[15 Aug 2009 04:50 AM]



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