संस्मरण
बद्री विशाल ने मुझे नहीं, रविकांत को बुलाया था....(ये एक दुखःद संस्मरण है। भगवान के द्वार पर ले जाने वाले रास्ते से बीच में लौट आना निश्चित ही निराश करने वाला रहा। गला ख़राब है इसलिए हर किसी के पूछने पर पूरा वाक्या नहीं बता सकता... सोचा डॉक्टर की हिदायत...
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ANURAAG MUSKAAN
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[18 May 2010 13:18 PM]



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