देख कचहरी में चलती हैं.....
भाई सतपाल ख्याल जी ने राहत इंदौरी साहब का मिसरा ग़ज़ल कहने के लिये अपने ब्लाग आज की ग़ज़ल पर लगाया था इस खूबसूरत मिसरे पर जो भी जैसा भी कह पाया उन्हें भेज दिया था लेकिन मिसरे का नशा दिमाग़ से उतरा नहीं सो उन्हें भेजने के बाद भी शेर होते रहे रदीफ बदल कर...
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योगेन्द्र मौदगिल
ग़ज़ल
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[22 May 2010 22:09 PM]



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