हाट में सरस्वती

एकोऽहम् ‘सात लाख?’ सुनकर मैं मानो धड़ाम् से गिरा। लगा, फोन के चोंगे में ज्वालामुखी फूट गया है और लावा बह कर मेरे कानों में समाए जा रहा है। मैं बहरा हो गया हूँ। कानों से बहता हुआ लावा मेरे मुँह में आ पहुँचा है। मेरी जबान जल गई है। मैं बहरा ही नहीं, गूँगा भी हो... [पूरी पोस्ट]
writer विष्णु बैरागी

जीवन का इन्‍द्रधनुष

views
39
upvote
6
downvote
0
rating
6
comments
7
[22 May 2010 20:30 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix