पर बैठा रहा सिरहाने पर .....

काव्य मंजूषा अब प्यार मुझे तन्हाई कर बढ़ के शाने पर रख दे सर तू साथ है तो सब है गौहरवर्ना है सब कंकर पत्थरअब कौन ग़मों का हिसाब करे बस खुशियों पर ही रक्खो नज़र तेरा प्यार सुलगता है दिल में और आँखों में खुशनुमा मंजरइक सच्ची बात कही थी कलसो आज चढ़ूँगी सूली परबोला ही... [पूरी पोस्ट]
writer 'अदा'
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[22 May 2010 18:29 PM]

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