ब्लॉग पढ़ने की चीज है?
ब्लॉग लिखे जा रहे हैं, पढ़े नहीं जा रहे। पठनीय भी पढ़े नहीं जा रहे। जोर टिप्पणियों पर है। जिनके लिये पोस्ट ब्राउज करना भर पर्याप्त है, पढ़ने की जरूरत नहीं। कम से कम समय में अधिक से अधिक टिप्पणियां – यही ट्रेण्ड बन गया है।यह चिठेरा भी जानता है और टिपेरा भी।...
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ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey
Hindi
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[22 May 2010 18:30 PM]



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