लिखे हुए शब्द
लिखे हुए शब्दों का कोई अर्थ नहींअगर वे सिगरेट कीआखरी कश की तरहजमीन पर फेंककरपांव से कुचल दिए जायें।लिखे हुए शब्दों की ताकतऐसी हो कि बुझता हुआ दीयाफिर से सुलग जायअन्याय सहते किसी व्यक्ति के साथन्याय हो जायया जी जाय फिर से कोई मरता हुआ...
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रतन चंद रत्नेश
कविता
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[22 May 2010 15:38 PM]



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