लिखे हुए शब्द

रतन चंद 'रत्नेश' लिखे हुए शब्दों का कोई अर्थ नहींअगर वे सिगरेट कीआखरी कश की तरहजमीन पर फेंककरपांव से कुचल दिए जायें।लिखे हुए शब्दों की ताकतऐसी हो कि बुझता हुआ दीयाफिर से सुलग जायअन्याय सहते किसी व्यक्ति के साथन्याय हो जायया जी जाय फिर से कोई मरता हुआ... [पूरी पोस्ट]
writer रतन चंद रत्नेश

कविता

views
8
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
5
[22 May 2010 15:38 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix