एक मंजर गर्मी का

ख़ुशबू.ए.गुलज़ार कभी कभी लैम्प पोस्ट के नीचे कोई लड़कादबा के पैन्सिल को उंगलियों मेंमुड़े-तुड़े काग़ज़ों को घुटनों पे रख केलिखता हुआ नज़र आता है कहीं तो..ख़याल होता है, गोर्की है!पजामे उचके ये लड़के जिनके घरों में बिजली नहीं लगी हैजो म्यूनिसपैल्टी के पार्क में बैठ कर... [पूरी पोस्ट]
writer Pavan
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[22 May 2010 15:11 PM]

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