जिस थाली में खाना उसी में छेद करना .......हमारी विशेषता है

साहित्य-सहवास चन्दा रे चन्दा ! ओ चन्दा !किस से सीखा ये धन्धा ?हम से ही सीखा होगा शायद क्योंकि हमारे अलावा तो कोई यह विद्याजानता नहीं अगर जानता भी है तोमानता नहीं जिस थाली में खाना उसी में छेद करना .......हमारी विशेषता है जिसे तूने खूब अपनाया है और आज एक बार फ़िर अपने... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
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[22 May 2010 10:59 AM]

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