सीख................(गजल).................श्यामल सुमन

हिन्दी साहित्य मंच रो कर मैंने हँसना सीखा, गिरकर उठना सीख लिया।आते-जाते हर मुश्किल से, डटकर लड़ना सीख लिया।। महल बनाने वाले बेघर, सभी खेतिहर भूखे हैं।सपनों का संसार लिए फिर, जी कर मरना सीख लिया।। दहशतगर्दी का दामन क्यों, थाम लिया इन्सानों ने।धन को ही परमेश्वर माना, अवसर... [पूरी पोस्ट]
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ग़ज़ल

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[22 May 2010 08:19 AM]