चौथे खंभे के ढपोरशंखी !!
आज की दुनिया में हर रोज, हम एक नई सुबह की कामना के साथ बिस्तर से उठते हैं और ऐसे में यदि कोई कह दे कि आज का दिन बड़ा अच्छा गुज़रेगा तो बस उसके मुंह में घी शक्कर डालकर जीवन के अग्निपथ पर चल देते हैं. हमारे इस दिवास्वप्न की पूर्ति के लिए, हमारे देश का...
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सम्वेदना के स्वर
चौथा खम्बा
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[22 May 2010 07:52 AM]



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