हाशिया

deehwara अभी जितना कहा है और उससे भी कम जितना लिखा हैऔर छोड़ दिया हैशब्द, वाक्य, अर्थ की पोटलियों मेंइधर-उधरमेज-किताब-अख़बारसब कहीं भटकने के लिएउससे कहीं ज्यादा- बहुत ज्यादारह गया हैटकने से-किसी कमीज़... [पूरी पोस्ट]
writer prkant
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[22 May 2010 06:17 AM]

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