एक ग़ज़ल : जूनून-ए-इश्क में हमनें ......

गीत  ग़ज़ल  औ गीतिका जुनून-ए-इश्क़ में हमने न जाने क्या होगा ! हैं इतने बेख़ुदी में गुम कि हम को क्या पता होगा मैं अपने इज़्तिराब-ए-दिल को समझाता हूँ रह रह कर कि जितना चाहता हूँ वो भी उतना चाहता होगा हमें मालूम है नाकामी-ए-दिल, हसरत-ए-उल्फ़त हमें तो आख़िरी दम तक वफ़ा से वास्ता... [पूरी पोस्ट]
writer आनन्द पाठक

ग़ज़ल

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[22 May 2010 05:56 AM]

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