छटी क़िस्त-कौन चला बनवास रे जोगी
छ्टी कि़स्त की तीन और ग़ज़लें-योगेन्द्र मौदगिल तन का क्या विश्वास रे जोगीतन तो मन का दास रे जोगीभगवे में भगवान बसे हैंजटा-जूट विन्यास रे जोगीउर्मिल पूछ रही लछमन सेकौन दोष मम् खास रे जोगीजाम-सुराही छूट गये सब टूट गया अभ्यास रे जोगीसूरज, चंदा, जुगनू,...
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सतपाल ख़याल
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[22 May 2010 04:57 AM]



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