कितने बामन, कितने रजपूत, मुसहर कितने...
2011 की जनगणना औपचारिक तौर पर शुरू हो चुकी है। शहरों-गांवों में घर-घर सेंससकर्मियों का जाना शुरू हो गया है। मगर, एक बहस का निपटारा अभी तक नहीं हुआ है। बहस इस बात पर हो रही है कि जनगणना हो किस तरह से। जनगणना में लोगों की जाति पूछी जाए या नहीं। खास विवाद...
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प्रणव प्रियदर्शी
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[22 May 2010 02:31 AM]



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