सामान्य और विशिष्ट लोगों की मानसिकता

मेरा गाँव मेरा देश जैसा मेरे देश का हाल है, ठीक वैसा ही मेरे गाँव का. समाज दो वर्गों में बनता है - सामान्य और विशिष्ट. विशिष्ट व्यक्ति साधन-संपन्न और कुटिलता में संपन्न हैं, जिसके कारण सरकार जो भीख निर्धनों के लिए देती है, ये उसके माध्यम होते हैं और उसमें से मोटा हिस्सा मर... [पूरी पोस्ट]
writer देवसूफी राम कु० बंसल

विशिष्ट वर्ग

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[22 May 2010 02:15 AM]

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