कोई कैसे कहेगा, जिंदा है अब हम

नीरव तोड़ बैठे रिश्ता-ए-ज़िदगी ही हमकोई कैसे कहेगा, ज़िदा है अब हमअब न उदास धड़कनें हैं न प्यास हैन तुम, न तुम्हारी याद, न खुशी, न ग़मन मचलते अरमाँ है, न बदहवासी का आलमअब तो हमारी तनहाई है और है हमतोड़ बैठे रिश्ता-ए-ज़िदगी ही हमकोई कैसे कहेगा, ज़िदा है अब हमन... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. राजेश नीरव
views
11
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
4
[22 May 2010 00:53 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix